आदमी - आदमी से चाहता क्या है | 'भारत' की नई हिंदी ग़ज़ल
मानव स्वभाव, अहंकार, टूटने और ज़माने के पाखंड पर आधारित एक मर्मस्पर्शी हिंदी ग़ज़ल... शरीफ़ों की गली में नहीं जाना 'भारत', इस ज़माने में शराफ़त का फ़ायदा क्या है ! आदमी - आदमी से चाहता क्या है, रंजिशें ग़म से उसे राब्ता क्या है! ज़हन में जब है इख़्तियार-ए-वफ़ा, चुनता नफ़रत का रास्ता क्या है! 'हम ही हम हैं' में जब सोच बहकती है, ख़ाक होना है, फिर ये वास्ता क्या है! क्यों कत्लेआम मचाते हैं ज़माने में, ऐसी सनक से दिल का रिश्ता क्या है! लोग ठुकरा के बिखर जाते हैं पल भर में यहाँ, दिल के टूटकर बिखरने से भी सस्ता क्या है! मुहब्बत की बातें जो करते हैं अक्सर यहाँ, चुभाते हैं जो दिल, वो खंज़र से ज़्यादा क्या है! 'बुरा' कोई कह दे या 'भला' कह दे, सबको मना लेने का रास्ता क्या है! क़ायदे-आज़म, सैयाद यहाँ बने फिरते हैं, उन्हें रोक लेने का आख़िर क़ायदा क्या है! शरीफ़ों की गली में नहीं जाना 'भारत', इस ज़माने में शराफ़त का फ़ा...