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Kavitaon_ki_yatra: संविधान से सवर्ण व्यथा (दीप छंद में काव्य प्रस्तुति)

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योग्यता की मृत्युशैया और संवैधानिक विसंगति: सत्य शोधन महागाथा "वर्तमान परिस्थितियाँ आज योग्यता को रुग्णावस्था में पहुँचाकर उसे मृत्युशैया की ओर अग्रसर करती प्रतीत हो रही हैं; संभवतः संविधान की विसंगति का चरम यही है। इस मर्मस्पर्शी सत्य को 'दीप छंद' (नसल १११) के कड़े शास्त्रीय अनुशासन में पिरोने का प्रयासों यहाँ क्या गया है, जहाँ प्रत्येक पंक्ति १० मात्राओं के गणितीय सन्तुलन पर आधारित है।                  ----  kavitaon_ki_yatra "भारी आरक्षण और सिसकती योग्यता: जब तराजू ही पक्षपाती हो जाए।" ​  दीप छंद: आरक्षण का भार और योग्यता का सत्य शोधन   चाल बहुत कमाल। सच शोधन सवाल।।   लिख जब संविधान। क्यों नूतन विधान।।   बहुत असम विधान। केवल हि अवमान।।  लिखा हि रक्षित लेख। सवर्ण बिन प्रलेख।।   जब हो सम प्रबोध। काहे फिर विरोध।।   दानव जब हि भाव। पाटत मनुज लाव।।   नारी रक्षण ढाल। बना कहि-कहि काल।।  कानून बन खेल। करता सब विषैल।।    जो नूतन विधान। करे हृदय श्मशान।। कर हृदय वीरान। दनुज बन इंस...