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श्रीरामायणामृतम् भाग-४-अवध कुमारों का गुरुकुल प्रस्थान,उनकी शिक्षा-दीक्षा व कुंडलिनी जागरण महत्व

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श्रीरामायणामृतम् भाग-३ सज्जनों! आप सभी के आशीर्वाद से मैंने पुनः रामायण लिखने का तुच्छ प्रयत्न किया है जिसे काव्य खण्डों में विभाजित कर यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ,आज के चतुर्थ प्रसंग में अवध कुमारों का गुरुकुल प्रस्थान,उनकी शिक्षा-दीक्षा व कुंडलिनी जागरण महत्व का वर्णन करने का प्रयत्न मैंने किया है। अपने इस रामायण के भाग-१ से ४ को जो कि बालकाण्ड है आधार देने के लिए मैंने यथोचित दोहे छंद,रसाल छंद,सार छंद,मोहिनी वर्णवृत्त छंद जो कि आदरणीय डॉ०ओमप्रकाश मिश्र 'मधुव्रत' जी के द्वारा नवान्वेषित छंद है प्रयोग किया है। आज के प्रस्तुत प्रसंग में सार /ललितपद व मोहिनी वर्णवृत्त छंद में तारक ब्रह्मनाम केवल राम को भावपुष्प प्रदान करने के साथ-साथ अवध कुमारों का गुरुकुल प्रस्थान को चौपाई छंद में आधार दिया गया है। आशा करता हूँ श्रीराम व सभी देवी-देवता के आशीर्वाद के साथ आप सभी भी मेरे इस रामायण को अपना आशीर्वाद प्रदान करने के लिए अपनी पुनीत प्रतिक्रिया अवश्य प्रदान करेंगे। आदरणीय डॉ०ओमप्रकाश मिश्र 'मधुव्रत' जी द्वारा निर्देशित नवान्वेषित मोहिनी_वर्णवृत्त छंद का विधान इस प्रकार है:- गण स...