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NEET Paper Leak Kavita: श्रम ही है ईमान हमारा | ताटंक छंद में तीखा व्यंग्य । kavitaon_ki_yatra

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संसार में विद्यार्थी नामक जीव एक ऐसा जीव है जो कभी भी संघर्षों से घबराता नहीं है, पर NEET paper leak जैसी समस्या उसके इस उमंग व उत्साह को क्षीण अवश्य कर देती है। उस विद्यार्थी को कैसा अनुभव होता है, ताटंक छंद में हिन्दी कविता के रूप में मेरा प्रयास सादर प्रस्तुत है ।                        -----Kavitaon_ki_yatra महीनों की तपस्या जब चंद रुपयों में बिक जाती है! (NEET पेपर लीक की हताशा को दर्शाता चित्र) श्रम ही है ईमान हमारा: NEET Paper Leak पर ताटंक छंद कविताएँ   श्रम ही है ईमान हमारा, डरते हम करने से क्या? एक गाँव डायन भी छोड़े, तुम विद्या भी छोड़े क्या? दिवा-रात्रि सब होम किया है, सुख जीवन के त्यागा है। लीक किये थोड़ा क्या सोचे, कोई रातें जागा है॥ पौरुष हीन मनुज जब होगा,सृजनशील फिर ना होगा।  आलस को जिसने रोपा है, कंटक उसने ही भोगा।।  क्यों वंशबेल ही नाश रहे, उग जाने तो दो‌ थोड़े।  चलना ही प्रारम्भ किये जो,  रास्ते उनके क्यों मोड़े।।    फूलों पे अभी चलेंगे जो, शूलें क्या सह लेंगे‌ वो।।...

आदमी - आदमी से चाहता क्या है | 'भारत' की नई हिंदी ग़ज़ल

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मानव स्वभाव, अहंकार, टूटने और ज़माने के पाखंड पर आधारित एक मर्मस्पर्शी हिंदी ग़ज़ल... शरीफ़ों की गली में नहीं जाना 'भारत', इस ज़माने में शराफ़त का फ़ायदा क्या है ! आदमी - आदमी से चाहता क्या है,  रंजिशें ग़म से उसे राब्ता क्या है!   ज़हन में जब है इख़्तियार-ए-वफ़ा,   चुनता नफ़रत का रास्ता क्या है!   'हम ही हम हैं' में जब सोच बहकती है,   ख़ाक होना है, फिर ये वास्ता क्या है!   क्यों कत्लेआम मचाते हैं ज़माने में,   ऐसी सनक से दिल का रिश्ता क्या है!   लोग ठुकरा के बिखर जाते हैं पल भर में यहाँ,  दिल के टूटकर बिखरने से भी सस्ता क्या है!   मुहब्बत की बातें जो करते हैं अक्सर यहाँ,  चुभाते हैं जो दिल, वो खंज़र से ज़्यादा क्या है!   'बुरा' कोई कह दे या 'भला' कह दे,   सबको मना लेने का रास्ता क्या है!   क़ायदे-आज़म, सैयाद यहाँ बने फिरते हैं,   उन्हें रोक लेने का आख़िर क़ायदा क्या है!  शरीफ़ों की गली में नहीं जाना 'भारत',   इस ज़माने में शराफ़त का फ़ा...