Kavitaon_ki_yatra: मरहटा छंद में गुरु पुत्रों के बलिदान की अमर गाथा व राष्ट्रीय पक्षी दिवस विशेष सृजन।
त्याग व बलिदान की अमर गाथा सह राष्ट्रीय पक्षी दिवस
"त्याग व बलिदान का आज वह पावन दिवस है जिसने हर माँ की आँखों को गीला कर दिया। इस हृदय विदारक घटना का वर्णन कर पाना भी संभव नहीं है, फिर भी मैंने गुरु पुत्रों को मरहटा छंद में भावपूर्ण श्रद्धांजलि देने का प्रयत्न किया है। इसी छंद की लय में पिरोकर, राष्ट्रीय पक्षी दिवस के उपलक्ष्य में मैंने पक्षी संरक्षण हेतु एक विनम्र अनुरोध भी साझा किया है।"
--- kavitaon_ki_yatra
नीले अंबर की शान : मत मारो इंसान
"मनुष्य अपने स्वार्थलोलुपता के वशीभूत हो पक्षियों को पिंजर बंद किया करता है, उन्हें कैद कर भोजन खिलाने में, उनसे बातें करने में उसे अच्छा लगता है और तो और अपनी क्षुधा शांत करने के लिए भी वह उनका शिकार करता आया है।
— kavitaon_ki_yatra
मरहटा छंद: भावपूर्ण काव्यांजलि
आँखों में पानी,चुप्पी ठानी,बोले ना मुँह खोल।
बेटा था कटता,छोड़ो रटता,पीते आँसू घोल।।
जब सोच भलाई,जग में भाई,फिर अपनी क्या सोच।
वह भारत माँ भी,तड़प उठी थी, देखी हाय खरोंच।।
वीरों की गाथा,जोड़ो हाथा,पावन कितने नाम।
जो सवा लाख से,एक लड़ाएँ,नहीं सरल यह काम।।
काव्य भावार्थ :- प्रस्तुत पंक्ति में उस हृदय विदारक(कलेजा झकझोर देने वाली) घटना का वर्णन है जिसमें गुरुपुत्रों (गुरु गोविंद सिंह जी के पुत्रों) की औरंगजेब द्वारा निर्मम हत्या का वर्णन है,पिता की विडंबना देखिए पुत्रों के बलिदान होते समय भी आँखों में पानी रहते हुए भी मौन रहा।पुत्र की निर्मम हत्या होते समय भी उस पिता के मन में इस संसार की भलाई की ही भावना थी।ऐसे दृश्य को देखकर भारत माता भी तड़प उठी थी।
हाथ जोड़कर ऐसे महावीरों,अमर बलिदानियों को मेरा भी नमन!सवा लाख से एक लड़ाने का काम तो कोई विरला ही कर सकता है।
राष्ट्रीय पक्षी दिवस विशेष
बस उड़ते रहना, नहीं ठहरना, चाह दिवस नित रैन।।
जीने दो हमको,कहते तुमको,छोड़ो जी अब प्राण।
हम कुछ ना चाहें,हमें बचाएँ,पाएँ हम ले त्राण।।
| शब्द | अर्थ |
| स्वार्थलोलुपता | अपने स्वार्थ के लिए अत्यधिक लालच |
| क्षुधा | भूख |
| पिंजर बंद | पिंजरे में कैद करना |
| दुर्लभ | जो कठिनता से मिले या लुप्त होने की कगार पर हो |
| मनोभाव | मन की भावनाएँ या विचार |
| साहिबजादा | गुरु पुत्र (सम्मानजनक संबोधन) |
| त्राण | मुक्ति या रक्षा |
निष्कर्ष
अश्रुपूर्ण परंतु गौरवशाली इतिहास व पक्षियों के मनदशा को वर्णन करती आज की इस ब्लॉग पोस्ट के हरएक शब्द कुछ बोलते-से प्रतीत होते हैं।एक ओर गुरु पुत्रों के बलिदानों की अमर गाथा और दूसरी ओर पक्षियों के आर्त हृदय से निकले करुण व्यथा का दर्शन कराती मरहटा छंद में यह प्रस्तुति आशा है आपके हृदय प्रकोष्ठ में अवश्य अपना स्थान बना पाई होगी। यदि यह पोस्ट आपके हृदय में अपना स्थान बना पाती है, तो आपके आशीर्वाद स्वरूपी प्रतिक्रियाओं की अभिलाषा है ताकि लेखन संबल बना रहे।
आगामी छंदों में मधुमालती, तपी, मर्कट दोहे पर कलम चलाने का प्रयत्न करूँगा।
शुभम्स्तु! — kavitaon_ki_yatra
🎯 छंद शास्त्र महापंडित परीक्षा (10 प्रश्न)
समय सीमा: 120 सेकंड
(सही उत्तर जानने के लिए विकल्प पर क्लिक करें)
१. पद्धरि छंद के प्रत्येक चरण में कितनी मात्राएँ होती हैं?
२. तपी छंद के प्रत्येक चरण का अंत (पदांत) कैसा होता है?
३. वसंत तिलका किस प्रकार का छंद है?
४. उल्लाला छंद के विषम और सम चरणों का योग क्या है?
५. पादाकुलक छंद में कुल कितनी मात्राएँ होती हैं?
६. सरसी छंद की मात्रा गणना (यति सहित) क्या है?
७. समुदर छंद की कुल मात्राएँ कितनी होती हैं?
८. मरहटा छंद की कुल मात्रा कितनी है?
९. वर्णिक छंद में गणना किस आधार पर की जाती है?
१०. छंद में 'यति' का क्या अर्थ है?
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