पीयूष वर्ष छंद: यत्न का प्रतिफल रत्न — गौरवशाली राष्ट्र के शिवसंकल्प की गाथा

पीयूष वर्ष छंद की आहुति: शिवसंकल्प के प्रतिफल प्राप्त भारत रत्न

"शब्द जब भावातिरेक में बहते हैं और राष्ट्र के गौरव का बखान करने के लिए एक शिवसंकल्प लिया जाता है, और जब पीयूष वर्ष जैसे सनातनी छंदों के अनुशासन को एक संतुलित शिक्षक की भांति साधा जाता है, तब ही ऐसे कालजयी काव्य सृजित हो पाते हैं।"

Piyush varsha chhand yatna ka pratifal ratna:gouravshaali rashtra ke shivasankalp ki gatha
"भारत रत्न का गौरव, चंद्रमा की पहली तस्वीर का विज्ञान और पीयूष वर्ष छंद का विधान—सत्यं शिवं सुंदरम्।

पीयूष वर्ष छंद: शास्त्रीय विधान

कुल मात्राएँ: 19 (प्रत्येक चरण में)
यति (विश्राम): 10 और 9 मात्राओं पर
चरणान्त (अंत): अनिवार्य रूप से लघु-गुरु (12)
विशेष: यह एक मात्रिक छंद है। विषम परिस्थितियों में लय हेतु 'गुरु' (2) को दो 'लघु' (1-1) किया जा सकता है।

📏 मात्रा गणना (उदाहरण)

पंक्ति भार योग
देश का है मान, 2+1+2+2+2+1 10
ना सम्मान ये। 2+1+2+2+2 09

देश का है मान, ना सम्मान ये।

आन है ये शान, भी विज्ञान ये।।

आज ही ये जान, दिव्यं ज्ञान ये।

चंद्र भी ना दूर, जो तू ठान ले।।

वार को भी प्यार, जो है नाम दे।

हार ना तू मान, बाधा घाम ले।।

लक्ष्य हो महान, दीक्षा धार ले।

राष्ट्र जो विस्तार, हिन्दी सार ले।।

ना लिया है जो, कुआत्मा वही है।

पा लिया है जो, शुभात्मा वही है।।

मापने को चाँद, जो आगे बढ़े।

मार्ग में चट्टान, भी सारे चढ़े।।

रार ज्वाला से, वही हैं ठानते।

हार को भी जीत, लेना जानते।।

विश्व के उस्ताद, नैया पार ले।

रत्न ये जो मिले, यत्नों दाम दे।। 

भारत भूषण पाठक'देवांश' 

काव्य भावार्थ:-भारत रत्न देश का सम्मान नही ं मान है। यह आन, शान और विज्ञान भी है। यह हमें जान लेना चाहिए कि यह दिव्य ज्ञान ही है। अपने साहस से मानव ने‌ चाँद को भी नाप लिया है। 

इस भारत भूमि की यह विशेषता रही है इसने शत्रुओं के वार‌ को 

प्यार समझा है, बाधाओं के तपिश में तपने वाला कभी हार नहीं मानता। महान लक्ष्यों की प्राप्ति सच्ची दीक्षा धारण करके ही होती है‌। राष्ट्र के विस्तार को हमें हिन्दी अपनानी होगी। कुआत्मा को ही कोई सम्मान नहीं मिलता, इस सम्मान को प्राप्त करने वाला कोई शुभात्मा ही होगा। यहाँ चाँद की दूरी तय करने वालों ने मार्ग में आनेवाले हर बाधाओं का सम्मान किया है। ज्वाला से रार(विद्रोह) वही कर सकते है़ं, जो हार को भी जीत में बदलने का सामर्थ्य रखते हैं। हे विश्व के उस्ताद नैया को पार लगा दो। इन भारत रत्नों ने अपने यत्न को ही दाम लगा दिया। 

📖 शब्दार्थ और विशिष्ट शब्दावली

शब्द भाव/अर्थ
तपिश कठिनाइयों या संघर्ष की गर्मी।
दीक्षा किसी महान लक्ष्य के लिए लिया गया संकल्प या शिक्षा।
कुआत्मा बुरी नीयत या नकारात्मक विचार वाला।
उस्ताद नैया जीवन रूपी नाव को कुशलता से पार लगाने वाला (कुशल सारथी)।
यत्न को दाम कठिन परिश्रम का उचित फल या मूल्य मिलना।

निष्कर्ष और पाठकीय संवाद : सारांश‌ में पीयूष वर्ष छंद बड़ी ही सरलता से लिखा जा सकता है, परन्तु छंद के विधान का अनुपालन करना अनिवार्य है। एक प्रसिद्ध छंदविज्ञ के अनुसार विषम में परिस्थिति में किसी गुरु को दो लघु यानि २-२ करने की छूट है, परन्तु मेरा अनुभव यह कहता है कि २  को १-१ करने की जगह २ का ही प्रयोग करना उत्तम है। 

इस  छंद के साथ आइए दो ओर‌ छंद के बारे में संक्षिप्त में जाना जाए
जिसमें एक छंद मंगलमाया छंद है , जिसमें कुल २२ मात्राएँ, ११-११ पर यति तथा यति के पूर्व पश्चात त्रिकल और अंत में‌ वाचिक गा अनिवार्य होता है, वही ं दूसरी ओर मरहटा छंद
प्रति चरण कुल २९ मात्राओं वाला छंद है, इसमें यति का विभाजन छंदविज्ञ आदरणीय बासुदेव अग्रवाल'नमन' जी द्वारा १०,८,११ मात्रा का है, उनके छंद विधान प्रयोग के आधार पर

प्रथम यति २+८=१० मात्रा, 
द्वितीय यति ८ मात्रा
तृतीय यति-८+३(गाल यानि २१) =११ मात्रा

अठकल की जगह दो चौकल लिये जा सकते है़। नियम का पालन चौकल में अठकल का ही होगा। ४ चरण समतुकांत या दो-दो चरण समतुकांत रखा जा सकता है। अंत्यानुप्रास होने से और उत्तम गेयता होगी। 
आपको यह लेख व छंदयुक्त काव्य अच्छा लगा हो तो‌ आपकी आशीर्वाद स्वरूपी प्रतिक्रिया अवश्य मिले। 

📝 छंद साधना: अभ्यास प्रश्न

  1. पीयूष वर्ष छंद में कुल कितनी मात्राएँ और यति का क्या विधान है?
  2. मंगलमाया छंद (सृजन: भारत भूषण पाठक 'देवा') में यति के पूर्व और पश्चात् किस गण की अनिवार्यता है?
  3. मरहटा छंद में कुल कितनी मात्राएँ होती हैं और 10+8+11 का मात्रा-बाँट नियम क्या है?
  4. मंदाक्रांता छंद के 17 वर्णों का गण-क्रम (मभनतत गागा) स्पष्ट करें।
  5. गंगोदक सवैया में कुल कितने सगण और वर्ण होते हैं?
  6. पीयूष वर्ष छंद के चरणांत में कौन सा मात्रा क्रम (12) अनिवार्य है?
  7. मंगलमाया छंद के अंत में 'वाचिक गा' का क्या अर्थ है?
  8. मरहटा छंद में 'अठकल' के स्थान पर कौन सा विकल्प प्रयोग किया जा सकता है?
  9. छंद शास्त्र के अनुसार गुरु (2) को दो लघु (1-1) में बदलने का नियम कब प्रभावी होता है?
  10. मंदाक्रांता छंद में यति किन-किन वर्णों (4, 6, 7) पर होती है?


"Quora और Instagram पर सराही गई मेरी विशेष प्रस्तुति [तरंग छंद: १७ वर्णों की ओजपूर्ण यात्रा] भी अवश्य पढ़ें।"

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