पीयूष वर्ष छंद: यत्न का प्रतिफल रत्न — गौरवशाली राष्ट्र के शिवसंकल्प की गाथा
पीयूष वर्ष छंद की आहुति: शिवसंकल्प के प्रतिफल प्राप्त भारत रत्न
"शब्द जब भावातिरेक में बहते हैं और राष्ट्र के गौरव का बखान करने के लिए एक शिवसंकल्प लिया जाता है, और जब पीयूष वर्ष जैसे सनातनी छंदों के अनुशासन को एक संतुलित शिक्षक की भांति साधा जाता है, तब ही ऐसे कालजयी काव्य सृजित हो पाते हैं।"📖 शब्दार्थ और विशिष्ट शब्दावली
| शब्द | भाव/अर्थ |
|---|---|
| तपिश | कठिनाइयों या संघर्ष की गर्मी। |
| दीक्षा | किसी महान लक्ष्य के लिए लिया गया संकल्प या शिक्षा। |
| कुआत्मा | बुरी नीयत या नकारात्मक विचार वाला। |
| उस्ताद नैया | जीवन रूपी नाव को कुशलता से पार लगाने वाला (कुशल सारथी)। |
| यत्न को दाम | कठिन परिश्रम का उचित फल या मूल्य मिलना। |
निष्कर्ष और पाठकीय संवाद : सारांश में पीयूष वर्ष छंद बड़ी ही सरलता से लिखा जा सकता है, परन्तु छंद के विधान का अनुपालन करना अनिवार्य है। एक प्रसिद्ध छंदविज्ञ के अनुसार विषम में परिस्थिति में किसी गुरु को दो लघु यानि २-२ करने की छूट है, परन्तु मेरा अनुभव यह कहता है कि २ को १-१ करने की जगह २ का ही प्रयोग करना उत्तम है।
इस छंद के साथ आइए दो ओर छंद के बारे में संक्षिप्त में जाना जाए
जिसमें एक छंद मंगलमाया छंद है , जिसमें कुल २२ मात्राएँ, ११-११ पर यति तथा यति के पूर्व पश्चात त्रिकल और अंत में वाचिक गा अनिवार्य होता है, वही ं दूसरी ओर मरहटा छंद
प्रति चरण कुल २९ मात्राओं वाला छंद है, इसमें यति का विभाजन छंदविज्ञ आदरणीय बासुदेव अग्रवाल'नमन' जी द्वारा १०,८,११ मात्रा का है, उनके छंद विधान प्रयोग के आधार पर
प्रथम यति २+८=१० मात्रा,
द्वितीय यति ८ मात्रा
तृतीय यति-८+३(गाल यानि २१) =११ मात्राअठकल की जगह दो चौकल लिये जा सकते है़। नियम का पालन चौकल में अठकल का ही होगा। ४ चरण समतुकांत या दो-दो चरण समतुकांत रखा जा सकता है। अंत्यानुप्रास होने से और उत्तम गेयता होगी।
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📝 छंद साधना: अभ्यास प्रश्न
- पीयूष वर्ष छंद में कुल कितनी मात्राएँ और यति का क्या विधान है?
- मंगलमाया छंद (सृजन: भारत भूषण पाठक 'देवा') में यति के पूर्व और पश्चात् किस गण की अनिवार्यता है?
- मरहटा छंद में कुल कितनी मात्राएँ होती हैं और 10+8+11 का मात्रा-बाँट नियम क्या है?
- मंदाक्रांता छंद के 17 वर्णों का गण-क्रम (मभनतत गागा) स्पष्ट करें।
- गंगोदक सवैया में कुल कितने सगण और वर्ण होते हैं?
- पीयूष वर्ष छंद के चरणांत में कौन सा मात्रा क्रम (12) अनिवार्य है?
- मंगलमाया छंद के अंत में 'वाचिक गा' का क्या अर्थ है?
- मरहटा छंद में 'अठकल' के स्थान पर कौन सा विकल्प प्रयोग किया जा सकता है?
- छंद शास्त्र के अनुसार गुरु (2) को दो लघु (1-1) में बदलने का नियम कब प्रभावी होता है?
- मंदाक्रांता छंद में यति किन-किन वर्णों (4, 6, 7) पर होती है?
"Quora और Instagram पर सराही गई मेरी विशेष प्रस्तुति [तरंग छंद: १७ वर्णों की ओजपूर्ण यात्रा] भी अवश्य पढ़ें।"
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